आओ क़ि रूह रूमानी करें
हसरतें -हैरानी करें ।
लम्हों का अट्टा गूंथ कर
ज़िन्दगी की रोटी तबानी करें ॥
ना तुम पहनो लिबास शर्म का
ना मैं ओढूँ अहम् का कम्बल ।
ख्वाहिशों के कोहरे में
जिस्म की रजाई से उर्यानी करें ॥
आओ की तारों की चादर तले छुप्प के
तार्रुफ़ करें अपने बिखरे सायों से ।
टटोल लो तुम मुझ में कुछ अपना सा
रुस्वाइयाँ पीछे छोड़ आसानी करें ॥
तुम धुप सी मुस्कुरा दो
में बादल सा पिघल जाऊं ।
आओ सारे आकाश में
एक सतरंगी नादानी करें ॥
आओ की साँसों की हरारत में
कुछ अधपके कच्चे सपने सेंक ले ।
दो जिस्म आग में झोंक के
एक अपना सा चुन बेईमानी करे ॥
आओ रूह रूमानी करें
हसरतें -हैरानी करें ।
चलो कि अब के साथ चलो
अलविदा-ए-वीरानी करें ॥
तबानी = brightness, उर्यानी= nakedness, तआरुफ़ = introduction, रुस्वाइयाँ = humiliations, insecurities
1 comment:
Mazaa aa Gaya. Keep writing Vaibhav..
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