Tuesday, December 13, 2016

Rooh Roomani

आओ क़ि रूह रूमानी  करें 
हसरतें -हैरानी करें । 
लम्हों का अट्टा गूंथ कर 
ज़िन्दगी  की  रोटी तबानी  करें ॥ 

ना तुम  पहनो लिबास शर्म का 
ना मैं ओढूँ अहम् का कम्बल । 
ख्वाहिशों के कोहरे में 
जिस्म की रजाई से उर्यानी करें ॥ 

आओ की तारों की चादर तले छुप्प के 
तार्रुफ़ करें अपने बिखरे सायों से । 
टटोल लो तुम मुझ में कुछ अपना सा 
रुस्वाइयाँ पीछे छोड़ आसानी करें ॥ 

तुम धुप सी मुस्कुरा दो 
में बादल सा पिघल जाऊं । 
आओ सारे आकाश में 
एक सतरंगी नादानी  करें ॥ 

आओ की साँसों की हरारत में  
कुछ अधपके कच्चे सपने सेंक ले । 
दो जिस्म आग में झोंक के 
एक अपना सा चुन बेईमानी करे ॥ 

आओ रूह रूमानी करें 
हसरतें -हैरानी करें । 
चलो कि अब के साथ चलो 
अलविदा-ए-वीरानी करें ॥ 

तबानी = brightness, उर्यानी= nakedness, तआरुफ़ = introduction, रुस्वाइयाँ = humiliations, insecurities